शिक्षक गलत तथ्यों के आधार पर सीटीईटी करने की तैयारी में हैं। कुछ बीएड उत्तीर्ण शिक्षक पोर्टल में खुद को डीएलएड दर्शा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि सीटीईटी प्रथम के लिए दो वर्षीय डिप्लोमा या चार वर्षीय बीएलएड की डिग्री अनिवार्य है लेकिन 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षक बीएड हैं, जो परीक्षा में बैठने के लिए खुद को डीएलएड होना दर्शा रहे हैं। जिससे ऐसे शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। शिक्षा विभाग में 2016 में हुई शिक्षक भर्ती में भी इस तरह का फर्जीवाड़ा हो चुका है। जिसमें कुछ बीएड उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने पोर्टल में खुद को डीएलएड दर्शाए जाने के बाद सीटीईटी के प्रमाणपत्र के आधार पर विभाग में नियुक्ति पा ली थी।


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