देहरादून : सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर मंतर पर प्रदर्शन चल रहा है. 20 जुलाई को जब इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उत्तराखंड से एक एक्टिविस्ट ऋशिकेश ट्रेन में सवार हुए तो उन्हें कथित तौर पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया. जब मामला उत्तराखंड कोर्ट में पहुंचा तो अदालत ने पुलिस से पूछा कि उन्हें किस कानून और किन हालातों में हिरासत में लिया गया था? प्रदर्शन में जाने से क्यों रोका गया?
दरअसल, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता प्रभाग ध्यानी उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष हैं. उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए बताया था कि वह सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने दिल्ली जा रहे हैं. वह अपने दो साथियों के साथ ऋषिकेश से ट्रेन में सवार हुए थे. उसके बाद उनका घंटों तक कुछ पता नहीं लगा.
घंटों तक नहीं मिली कोई जानकारी
परिवार का कहना है कि रविवार शाम करीब 5:15 बजे ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर कुछ पुलिसकर्मी उन्हें अपने साथ ले गए. इसके बाद काफी देर तक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. न यह बताया गया कि उन्हें कहां रखा गया है और न ही हिरासत की वजह बताई गई. इसी के बाद पार्टी के सचिव ने हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की. याचिका में कहा गया कि पुलिस ने हिरासत के आधार,न और उनकी स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी, जो कानून और संविधान के खिलाफ है.
परिवार का कहना है कि रविवार शाम करीब 5:15 बजे ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर कुछ पुलिसकर्मी उन्हें अपने साथ ले गए. इसके बाद काफी देर तक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. न यह बताया गया कि उन्हें कहां रखा गया है और न ही हिरासत की वजह बताई गई. इसी के बाद पार्टी के सचिव ने हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की. याचिका में कहा गया कि पुलिस ने हिरासत के आधार,न और उनकी स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी, जो कानून और संविधान के खिलाफ है.


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